“जैसा मेने सहा है, कोई और न सहे”

Swati Mehrotra घर एक ऐसी जगह है जहा हम सब खुद को बहुत महफूज़ समझते है | सुरक्षित रहने और आगे बढ़ने के लिये इस दुनिया में ‘परिवार’ सभी की सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता है। किसी के भी जीवन में परिवार की कई सारी महत्वपूर्ण भूमिकाएँ होती है। माता –पिता हमारे आदर्श और भाई –बहन हमारे सबसे … Continue reading “जैसा मेने सहा है, कोई और न सहे”

हमें आपकी दया, तरस नहीं सिर्फ प्यार चाहिये….

अगर आप मुझे पसंद नहीं करते तो ये मेरी समस्या नहीं है | जब मैं मेंडिटेशन करती हूँ, तब मेरे अन्दर की आत्मा भगवान् से जुड़ जाती है, उससे मुझे मदद मिलती है शक्ति मिलती है कुछ अच्छा करने की | एचआईवी लोगों से भेदभाव नहीं करता बल्कि लोग भेदभाव करते हैं | हमें आपकी दया, तरस नहीं सिर्फ प्यार चाहिये...

अस्तित्व की सामाजिक लड़ाई है “विधवा “

यह सच में महिला सशक्तिकरण का दुनिया भर में डंका पीटने वाले देश के लिए भयावाह स्थिति है | विधवा महिला को डायन कह देना या पति की मौत के लिए उसे जिम्मेदार ठहराना पूरे भारत में आम है | ऐसी महिला का चरित्र सदा शक के दायरे में डाल दिया जाता है , चाहे वो किसी से भी 2 मिनट बात भी कर ले तो |

मैं तो शुरू से ही चाँद थी, बस थोड़े दिन का ग्रहण था

बेटियों का हाथ माता-पिता एक अजनबी को इस आशा के साथ देते हैं कि वो उसको वैसे ही आदर व सम्मान के साथ देखें जैसे उन्होंने देखा परंतु हमेशा ऐसा नहीं होता। सदियाँ बीत जाने के बाद आज भी दहेज़ के नाम पर बेटियाँ बलि चढ़ रही हैं। स्नेहा जावले की कहानी भी कुछ ऐसी ही है परंतु फ़र्क़ बस इतना है...

शिक्षकों को स्वायत्त सत्ता के रूप में स्थापित करना ही एकमात्र लक्ष्य

शिक्षा शास्त्र में अध्यापन शैली को सुदृढ़ व बाल सुगम बनाने के लिए अपनी अपनी परम्पराओं व अंतर्निहित ज्ञान के अनुसार सभी राज्यों व जिलों ने अनगिनत नवाचार व प्रयोग किये है परिणाम स्वरुप आज देश शत प्रतिशत साक्षरता दर को पाने की दौड़ में बेहतर स्तिथि बनाए हुए है. आपेक्षिक स्तर पर बेहतर परिणामों के बावजूद देश का आदिवासी बेल्ट आज भी इन प्रयासों में तो बहुत आगे है परन्तू आपेक्षिक परिणाम को प्राप्त करना कमरतोड़ प्रयासों से ही संभव है.

मन की दो बातें…

वेब वाल जर्नल पर यह हमारा पहला सम्पर्क है तो सबसे पहले काम की ही बात हो जाए। हर कोई अपने जीवन में और ख़ास तौर पर कार्य स्थल पर अपने काम को ले कर चाहता है की वह सफल हो, उसका समर्थन किया जाए और उसके काम को मूल्यवान समझा जाए। करियर के आरंभिक दिनों में यह बदलाव अक्सर होता है की पहले तो घर लौटते हुए थके-थके से लगते थे।

जा रे पर्यावरण, तुम तो चुनावी मुद्दा भी नहीं हो

उत्तर प्रदेश के चुनाव में पर्यावरण को एक गंभीर मुद्दा इसलिए भी बनाना जरुरी है क्योंकि तेजी से बढ़ते हुए शहरीकरण और विकास ने यूपी में कई दिक्कतें खड़ी की हैं। इसमें सबसे महत्वपूर्ण है कि राज्य के हर हिस्से में प्रदूषण का स्तर बढ़ गया है। विश्व बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक देश के सबसे 20 प्रदूषित शहरों में से चार यूपी के हैं।