“जैसा मेने सहा है, कोई और न सहे”

Swati Mehrotra घर एक ऐसी जगह है जहा हम सब खुद को बहुत महफूज़ समझते है | सुरक्षित रहने और आगे बढ़ने के लिये इस दुनिया में ‘परिवार’ सभी की सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता है। किसी के भी जीवन में परिवार की कई सारी महत्वपूर्ण भूमिकाएँ होती है। माता –पिता हमारे आदर्श और भाई –बहन हमारे सबसे … Continue reading “जैसा मेने सहा है, कोई और न सहे”

हमें आपकी दया, तरस नहीं सिर्फ प्यार चाहिये….

अगर आप मुझे पसंद नहीं करते तो ये मेरी समस्या नहीं है | जब मैं मेंडिटेशन करती हूँ, तब मेरे अन्दर की आत्मा भगवान् से जुड़ जाती है, उससे मुझे मदद मिलती है शक्ति मिलती है कुछ अच्छा करने की | एचआईवी लोगों से भेदभाव नहीं करता बल्कि लोग भेदभाव करते हैं | हमें आपकी दया, तरस नहीं सिर्फ प्यार चाहिये...

The RainbowMan “Harish Iyer”

This is Harish Iyer, an equal rights activist, who is most popularly known for his campaigns for the rights of the Lesbian-Gay-Bisexual-Transgender (LGBT) community and Child Sexual Abuse (CSA). For the very first time I heard him speaking at REX Conclave in 2014. It was the silence that suddenly surrounded me. Tears flow within my heart imagining his state of mind and his past.

Main Badi Ho Gayi Huun

But the next day when I woke up, my undergarments were even more stained.With no other options left, I had to tell my mother. She cried and realized that she could have prepared me for this day, she then told me what all I have to use and what all problems I could have during this time. She also said that my blood is impure during this time and I should not entered the house of god. This time I understood the meaning of “Main Badi Ho Gayi Hun”.

मैं तो शुरू से ही चाँद थी, बस थोड़े दिन का ग्रहण था

बेटियों का हाथ माता-पिता एक अजनबी को इस आशा के साथ देते हैं कि वो उसको वैसे ही आदर व सम्मान के साथ देखें जैसे उन्होंने देखा परंतु हमेशा ऐसा नहीं होता। सदियाँ बीत जाने के बाद आज भी दहेज़ के नाम पर बेटियाँ बलि चढ़ रही हैं। स्नेहा जावले की कहानी भी कुछ ऐसी ही है परंतु फ़र्क़ बस इतना है...

मन की दो बातें…

वेब वाल जर्नल पर यह हमारा पहला सम्पर्क है तो सबसे पहले काम की ही बात हो जाए। हर कोई अपने जीवन में और ख़ास तौर पर कार्य स्थल पर अपने काम को ले कर चाहता है की वह सफल हो, उसका समर्थन किया जाए और उसके काम को मूल्यवान समझा जाए। करियर के आरंभिक दिनों में यह बदलाव अक्सर होता है की पहले तो घर लौटते हुए थके-थके से लगते थे।