मैं तो शुरू से ही चाँद थी, बस थोड़े दिन का ग्रहण था

बेटियों का हाथ माता-पिता एक अजनबी को इस आशा के साथ देते हैं कि वो उसको वैसे ही आदर व सम्मान के साथ देखें जैसे उन्होंने देखा परंतु हमेशा ऐसा नहीं होता। सदियाँ बीत जाने के बाद आज भी दहेज़ के नाम पर बेटियाँ बलि चढ़ रही हैं। स्नेहा जावले की कहानी भी कुछ ऐसी ही है परंतु फ़र्क़ बस इतना है...

शिक्षकों को स्वायत्त सत्ता के रूप में स्थापित करना ही एकमात्र लक्ष्य

शिक्षा शास्त्र में अध्यापन शैली को सुदृढ़ व बाल सुगम बनाने के लिए अपनी अपनी परम्पराओं व अंतर्निहित ज्ञान के अनुसार सभी राज्यों व जिलों ने अनगिनत नवाचार व प्रयोग किये है परिणाम स्वरुप आज देश शत प्रतिशत साक्षरता दर को पाने की दौड़ में बेहतर स्तिथि बनाए हुए है. आपेक्षिक स्तर पर बेहतर परिणामों के बावजूद देश का आदिवासी बेल्ट आज भी इन प्रयासों में तो बहुत आगे है परन्तू आपेक्षिक परिणाम को प्राप्त करना कमरतोड़ प्रयासों से ही संभव है.

Neighbours’ envy…

The intensively-researched book analyses the state of affairs on the foreign policy front on the North and North-western frontiers, Pakistan policy, China and India’s policy paralysis in regard to it, Myanmar ties, Bangladesh, uneasy relationship with Nepal, Bhutan, Indo-ASEAN ties, Sri Lanka, etc.

Disability Discourse West to East: A Critical Reflection

Sameer Chaturvedi is a PhD scholar at the Centre for Study of social systems, JNU. He is a young enthusiastic scholar in disability studies. Sameer himself is living with Cerebral Palsy, and he strongly believes that his disability is not a barrier to development of his "self".

Dark side of Tamil Nadu politics and the judiciary

Coming to the present scenario of Tamil Nadu, Governor Ch. Vidyasagar Rao who resisted awaiting the judgment before appointing Ms. Sasikala as the Chief Minister has to ensure that the MLAs are able to choose their next leader without fear or coercion. It is also notably questionable that Ms Sasikala cannot contest for election for six more years but after expiry of the said duration, “will she personally contest again”, “will it close the chapter of corruption in Tamil Nadu”. Yet, the opinion and views lies on the general public but for today one can truly accept, “No matter how much powerful and corrupted a person may be, the LAW is above all”.

मन की दो बातें…

वेब वाल जर्नल पर यह हमारा पहला सम्पर्क है तो सबसे पहले काम की ही बात हो जाए। हर कोई अपने जीवन में और ख़ास तौर पर कार्य स्थल पर अपने काम को ले कर चाहता है की वह सफल हो, उसका समर्थन किया जाए और उसके काम को मूल्यवान समझा जाए। करियर के आरंभिक दिनों में यह बदलाव अक्सर होता है की पहले तो घर लौटते हुए थके-थके से लगते थे।